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vaidya surenderpal


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चंचल तितली ले उड़ी

Posted On: 22 Aug, 2016  
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कविता में

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सुमन और काँटे

Posted On: 17 Aug, 2016  
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गौरव गान

Posted On: 15 Aug, 2016  
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कांग्रेस की हठधर्मिता

Posted On: 10 Dec, 2015  
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Others Others Politics में

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*वर्ष प्रतिपदा*

Posted On: 21 Mar, 2015  
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Others Others कविता में

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होली पर कुछ मुक्तक

Posted On: 4 Mar, 2015  
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Hindi Sahitya Others कविता में

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होली के सुन्दर रंग

Posted On: 2 Mar, 2015  
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Others कविता में

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स्वाभिमानी भारत का निर्माण

Posted On: 24 May, 2014  
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Others Politics कविता में

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रंग बिखराते रहे

Posted On: 13 Mar, 2014  
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*यादों में*

Posted On: 17 Feb, 2014  
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Contest Others कविता में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: vaidya surenderpal vaidya surenderpal

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

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के द्वारा: ikshit ikshit

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

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के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: चित्रकुमार गुप्ता चित्रकुमार गुप्ता

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

इक्कीसवीँ सदी में विज्ञान ने दूरसंचार तथा सूचना प्रौद्यौगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व आविष्कार किये हैं। कम्प्यूटर तथा इन्टरनेट के बढ़ते उपयोग ने देश के जनजीवन को बदलकर रख दिया है। राष्ट्र के समाज जीवन के ये जरूरी अंग बन गए है। शिक्षा के क्षेत्र में तो यह पूरी तरह से अपनी पैठ बनाते जा रहे हैं। स्कूली बच्चों को भी मुफ्त में लैपटाप बांटने की घोषणाएं आए दिन राजनेताओं द्वारा की जा रही है। आज धन और तकनीक की शक्ति से भ्रष्ट और लोभी सत्ता की राजनीति ने पूरी संवेदनहीनता के साथ देश की हिन्दी के साथ खिलवाड़ शुरू कर दिया है। सत्ता की राजनीति में अन्धे राजनेता अंग्रेजी की चकाचौंध में दिग्भ्रमित हो गए हैं। उन्होंने अंग्रेजी को ज्ञान, विज्ञान और विकास की भाषा मान लिया है। हिन्दी को राजभाषा का दर्जा देने के बाद भी अंग्रेजी का पोषण जारी है। देश की भाषाएँ अपने बूते आगे बढ़ रही है। हर जगह शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी बनती जा रही है। इस प्रकार हम देखते है की हिन्दी भाषा को देश की मुख्यधारा से काटने के प्रयास किए जा रहे हैं। सही कहा आपने आदरणीय श्री वैध्य सुरेन्द्र पाल जी ! अपने ब्लॉग पर आपके विचारों का स्वागत करूँगा http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2013/09/20

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

सैंकड़ों वर्षों की गुलामी के पश्चात जब हमारा देश स्वाधीन हुआ तो इसकी सत्ता उसी कांग्रेस के हाथों में आई जिसकी स्थापना 1885 मेँ एक अंग्रेज ए.ओ.ह्यूम ने की थी। इसकी स्थापना के पश्चात इसमें बहुत से देशभक्त भारतीय लोग आए जिनके कारण यह आजादी की लड़ाई लड़ने वाली पार्टी मे परिवर्तित हो गई। इसी में रहकर बाल गंगाधर तिलक, सुभाषचन्द्र बोस तथा सरदार पटेल जैसे लोगों ने भी काम किया था। आजाद भारत की बागडोर नेहरू के हाथों मे आने के कारण देश की स्वदेशी पहचान को पर्याप्त उभार न मिल सका क्योँकि नेहरु के व्यक्तित्व और मन पर अंग्रेजी सभ्यता का पूरा प्रभाव था। इसी के कारण देश का शासन उसी राह पर चला जैसा अंग्रेज छोड़ गए थे। भारतीय संस्कृति की भंयकर उपेक्षा का शिकार इसकी भाषाएं भी हुई जिससे आज छह दशक बीत जाने के बाद भी देश के प्रशासनिक कार्यों में अंग्रेजी का ही बोलबाला है। देश की प्रशासनिक सेवाओं मेँ जो अधिकारी आते हैं उनकी शिक्षा दीक्षा में अंग्रेजी का अंग्रेजी भाषा और सभ्यता का प्रभाव देखने में अधिक मिलता है। behatreen aalekh shri vaidhya ji

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: bhanuprakashsharma bhanuprakashsharma

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

सही विश्लेषण, १००% सत्य. ...बधाई. हिन्दू एवं हिंदुत्व को समझे बिना उसके प्रति क्षुद्र दृष्टिकोण एवं अन्य विचारधाराओं के प्रति अत्यधिक लेकिन कृत्रिम सहिष्णुता, यह आज के तथाकथित नेताओं और बुद्धिजीवियों की वर्तमान क्षुद्र मानसिकता का द्योतक है. ...वास्तव में वे किसी के सगे नहीं हैं, बस अवसरवादी हैं. ..या अपनी खोखली विद्यता का गुमान है उन्हें, तो कुएं के मेंढक हुए वे! सही बात है कि इस समय हर किसी को दलगत तथा व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठने-उठाने की आवश्यकता है, यह तभी संभव होगा जब हम अपनी मानसिकता या सोच को सही मायनों में ऊपर उठायेंगे, और तब ही हम वास्तविक विकास की ओर बढ़ पायेंगे, अन्यथा और नीचे ही जायेंगे.

के द्वारा: Alarming Alarm Alarming Alarm

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

कुल मिलाकर देखेँ तो लगेगा कि देश मेँ यूपीए के भ्रष्ट शासन के विरूद्ध पूरा देश आक्रोशित है । लेकिन विपक्ष अलग अलग खेमोँ मेँ विभाजित है । इससे छोटे छोटे गुटोँ द्वारा भ्रष्ट यूपीए सरकार के विरूद्ध आवाज सीमित हो जाती है । इसीका लाभ उठाकर सोनिया पार्टी की नापाक सरकार का काम आसान हो रहा है । दलगत स्वार्थोँ मेँ विभाजित देश की राजनीति का सीधा लाभ उठाकर ही कांग्रेस अब तक राज करती आई है । पैसे से खरीदकर, सीबीआई का दुरुपयोग कर, आरक्षण, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण, जातिगत विभाजन की राजनीति करके देश को हानि पँहुचाने का क्रम बदस्तूर जारी है । आज देश को एक कुशल, देशभक्त तथा दृढ़ इच्छाशक्ति वाले मजबूत राजनैतिक नेतृत्व की आवश्यकता है । आवश्यकता तो हो मान्यवर किन्तु जनता अभी भी बाटी हुई है ऐसे में स्पष्ट बहुमत मिल पाना संभव नहीं दीखता !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय वैद्य सुरेन्द्र पाल जी अभिवादन सुन्दर विचार आप के यही सब चिंता से सब ग्रसित हैं लेकिन कोई अपनी पार्टी और अजेंडे से उठ कर कुछ नया नहीं करना चाहता भ्रष्ट व्यवस्था दिनों दिन हमें कमजोर करती जा रही है सब को मिल नैतिकता का दामन थामे शीघ्र कुछ करना होगा -- सार्थक लेख -बधाई ऐसे संकट के माहौल मेँ देश को सशक्त राष्ट्रवादी राजनैतिक नेतृत्व की आवश्यकता है । लेकिन यह देश का दुर्भाग्य है कि हमारे देश के राष्ट्रवादी दल भी तथाकथित सैकुलरवाद की घटिया तुष्टीकरण के कारण समझौतावादी रास्ते पर चल पड़े हैँ । आज देश के सामने एक भयानक राजनैतिक शून्य है जिसके विषय मेँ सभी देशभक्तोँ को गंभीरता से विचार करना चाहिए शुक्ल भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

आप सही कहते हैं कि हमारा बेशुमार धन विदेशी बैँकोँ की शोभा बढ़ा रहा है, और हम टकटकी लगाए मन्दिर के खजाने को देख रहे हैँ । चोरों की गृद्धदृष्टी मंदिरों के खजानों पर भी पड रही है. अगर दुर्भाग्य से यह खजाना कभी चोरों के हाथ में पड गया तो इसे भी बेंचकर स्विस बैंकों में पहुंचा दिया जाएगा. वहाँ देश की नज़रों से दूर धन सुरक्षित रहता है. अवश्य यह दिल्ली के राजपरिवार की जानकारी से बचा नहीं होगा. हमारे प्राचीन गुलामीकाल में विदेशी आक्रान्ता लुटेरे रक्तपात द्वारा देश का धन लूट कर ले जाते थे. इस लोकतांत्रिक युग में शासकीय सहयोग से देश का लूटा हुआ धन हवाला और अन्य शातिर, कुटिल चालों द्वारा विदेशी बैंकों में पहुंचा दिया जाता है. लुटेरे अमीर हो रहे हैं और देश गरीब हो रहा है. एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण विषय की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए बहुत बहुत बधाई

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