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गुनगुनायें (CONTEST)

Posted On: 4 Jan, 2014 Others,कविता में

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*गीत प्यारा गुनगुनायें*
.
प्रकृति के साथ हिलमिल,
गीत प्यारा गुनगुनायें।
.
भोर की बेला सुनहरी,
प्राणियों ने चक्षु खोले।
हर तरफ हैं स्वर्ण किरणें,
होँठ पर प्रिय सुर अबोले।
.
पाखियों के झुंड मिलकर चहचहायें।
प्रकृति के साथ हिलमिल,
गीत प्यारा गुनगुनायें।
.
ओस की बूँदे टपकती,
मखमली सी घास पर।
और चूल्हों का धुआँ,
उठ रहा आकाश पर।
.
खिल उठी हैं
सुप्त मन की भावनायें।
प्रकृति के साथ हिलमिल,
गीत प्यारा गुनगुनायें।
.
चल पड़ी है जिन्दगी,
स्वयं अपनी राह पर।
छल कपट से दूर अब तक,
प्रीत अपनी चाह पर।
.
स्नेह की अविराम निर्मल भावनायें।
प्रकृति के साथ हिलमिल,
गीत प्यारा गुनगुनायें।
——————-
-सुरेन्द्रपाल वैद्य।



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
February 13, 2014

अच्छी रचना और पुरस्कृत होने की बदहि स्वीकारें आदरणीय वैद्य जी!

    jlsingh के द्वारा
    February 13, 2014

    अच्छी रचना और पुरस्कृत होने की बधाई स्वीकारें आदरणीय वैद्य जी!

yamunapathak के द्वारा
January 19, 2014

प्रकृति से प्यार जीवन को प्रेमपूर्ण कर देता है. एक बहुत ही मधुर भाव से लबरेज़ कविता के लिए आपका धन्यवाद

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 19, 2014

    उत्साहवर्धन करते सुन्दर शब्दों के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद यमुना पाठक जी।

yamunapathak के द्वारा
January 8, 2014

आदरणीय सर जी ओस की बूँदे टपकती, मखमली सी घास पर। और चूल्हों का धुआँ, उठ रहा आकाश पर। .बहुत सुन्दर शब्द चित्र हैं साभार

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 8, 2014

    यमुना पाठक जी, आपकी सार्थक प्रतिक्रिया के लिए बहुत आभारी हुँ।

January 7, 2014

बहुत सुन्दर आदरणीय

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 8, 2014

    हार्दिक आभार आपका चित्रकुमार गुप्ता जी।

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 7, 2014

आदरणीय सुरेन्द्र जी , सादर ! ह्रदय की सहज उपज ही गीत और कविता है ! मंगल कामनाओं सहित !1

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 8, 2014

    आचार्य विजय जी आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए आभारी हुँ।

ranjanagupta के द्वारा
January 7, 2014

बहुत समय बाद आपको पढा !,अच्छा प्रकृति गीत !

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 8, 2014

    आभार आपका रंजना गुप्ता जी। कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण समय नहीं निकाल पाया।

kumardineshmishra के द्वारा
January 4, 2014

कमेंटट िलखते समय़ कयूरटी की  परेशानी बनी है कया कऱू

kumardineshmishra के द्वारा
January 4, 2014

कमेंट िलखते समय़ कयूरटी की  परेशानी बनी है कया कऱू


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