शब्दस्वर

Just another weblog

78 Posts

363 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5617 postid : 685006

स्वामी विवेकानन्द (contest)

Posted On: 10 Jan, 2014 Others,कविता,Contest में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

स्वामी विवेकानन्द
——————————
सारी दुनिया मना रही है,
सार्धशती उस जन नायक की।
नाम विवेकानन्द है जिसका,
भारत माँ के सुत महान की।
.
बाल्यकाल से ही मन में था,
प्राणिमात्र हित सेवा भाव।
बालसुलभ उत्श्रृंखलता मेँ भी,
मानवता का था प्रभाव।
.
गुरुवर ठाकुर रामकृष्ण के,
चरणों में प्रिय शिष्य बने।
शाँत हुई तब ज्ञान पिपासा,
विवेक जगा गुणवान बने।
.
परिव्राजक सन्यासी बन,
भारत भर का म्रमण किया।
रामकृष्ण मठ स्थापित करके,
सेवा का दृढ़ संकल्प लिया।
.
नर सेवा नारायण सेवा,
का जग को संदेश दिया।
जाति पंथ का भेद भुलाकर,
समता का नव आधार दिया।
.
अखिल विश्व में हिन्दू धर्म की,
विजय पताका फहराई।
भारतीय संस्कृति की गरिमा,
महिमा मंडित करवाई।
.
जागृत रहकर लक्ष्य प्राप्ति का,
युवकों में संचार किया।
भारत माता के चरणों में,
नतमस्तक सब संसार किया।
.
आज समय की मांग यही है,
हर भारतवासी उठ जागे।
भारत भू का नाम विश्व में,
चमके सब कार्यों आगे।
.
स्वामीजी के आदर्शों को,
निज जीवन मेँ सब अपनायें।
सच्चे श्रद्धासुमन यही हैं,
अपना जीवन धन्य बनायें।

——————–
-सुरेन्द्रपाल वैद्य



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Abid ali mansoori के द्वारा
January 31, 2014

बहुत बढ़िया आदरणीय सुरेन्द्र पाल जी!

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 31, 2014

    आपका बहुत धन्य़वाद आबिद अली जी।

January 10, 2014

बहुत सुन्दर  भावनात्मक अभिव्यक्ति .सार्थक प्रस्तुति . .आभार

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 13, 2014

    शालिनी कौशिक जी आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिये बहुत आभारी हुँ।


topic of the week



latest from jagran