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*मुक्तक* (contest)

Posted On: 22 Jan, 2014 Others,कविता,Contest में

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*मुक्तक*
—————–

प्यार का जिन्दगी में जलाओ दिया।
फूल सा खिल उठेगा तुम्हारा हिया।
रौशनी प्यार की जब बिखर जायेगी।
घर लगेगा तुम्हेँ जगमगाता हुआ।
—————–
रास्ते प्यार के हैं ये काँटों भरे।
देखकर हर कदम सोच कर ही धरें।
बढ़ गये तो नहीं हारना हौंसला।
छोड़ दो सोचना क्या करें न करें।
—————–
साथ आओ बढ़ें प्रेम की राह पर।
खिल रहे फूल पर एक नजर डाल कर।
रुकना नहीं हैं हमें अब कहीँ।
यूँ महकता कटेगा ये पूरा सफर।
—————–
प्रेम का गीत तुम गुनगुननाओ मधुर।
घोल दो प्यार में अपने मीठे से स्वर।
दिल में गहरे से जब ये उतर जायेंगे।
छलक आएगा आंखो में इसका असर।
—————–
भोर की लालिमा से सजा है गगन।
बह रही है धरा पर शीतल पवन।
तेज का पुँज सूरज उदित हो रहा।
प्रफुल्लित हुए जा रहे सबके मन।

——————-
-सुरेन्द्रपाल वैद्य।



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
February 22, 2014

आदरणीय सर जी अंतिम मुक्तक बहुत सुन्दर है साभार

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 22, 2014

    उत्साहवर्धन करते सुन्दर शब्दों के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद यमुना पाठक जी।

sanjay kumar garg के द्वारा
January 27, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति सर! आभार!

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 28, 2014

    आपका हृदय से आभार संजय कुमार जी।

सौरभ मिश्र के द्वारा
January 27, 2014

बहुत सुन्दर मुक्तक श्रीमान

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 28, 2014

    हार्दिक आभार आपका सौरभ मिश्र जी।

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 25, 2014

bahut sundar .badhai

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 26, 2014

    सुन्दर प्रतिक्रिया के लिये आपका धन्यवाद शिखा कौशिक जी।

nishamittal के द्वारा
January 23, 2014

वाह बहुत सुन्दर मुक्तक सुरेन्द्र जी.बधाई

    vaidya surenderpal के द्वारा
    January 24, 2014

    उत्साहवर्धन करते सुन्दर शब्दों के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद निशा मित्तल जी।


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