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*यादों में*

Posted On: 17 Feb, 2014 Others,कविता,Contest में

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*यादों में*
—————.spring

आज फिर,
यादों में कोई आ गया है।
.
अलविदा कहकर,
गया था मैं जिसे।
भूलने की,
लाख कोशिश की उसे।
.
फूलों में शायद,
महकता वह रह गया है।
.
साथ उसका,
ही सुहाता था मुझे।
रूप का वह भाव,
भाता था मुझे।
.
मुस्कुराता फूल,
फिर कुछ कह गया है।
.
स्वप्न की दुनिया में,
जीना छोड़कर।
यथार्थ से ही,
आज नाता जोड़कर।
.
आंख से आंसू,
टपकता कह गया है।

——————-
-सुरेन्द्रपाल वैद्य।



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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

meenakshi के द्वारा
March 12, 2014

अति सुन्दर भावाभ्यक्ति ! सुरेन्द्रपाल वैद्य जी आपको बहुत -२ बधाई ! साथ ही होली पर्व की अनेकानेक शुभकामनाओं के साथ – मीनाक्षी श्रीवास्तव

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 13, 2014

    कविता के विषय में आपकी सुन्दर टिप्पणी के लिए बहुत आभारी हुँ मीनाक्षी श्रीवास्तव जी।

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
March 6, 2014

bahut sundar bhavabhivyakti .aabhar

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 13, 2014

    आपका हृदय से आभार शिखा कौशिक जी।

Alka के द्वारा
February 25, 2014

आदरणीय सुरेन्द्र जी | बहुत सुन्दर रचना … मुस्कराता फूल फिर कुछ कह गया .. बधाई ..

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 27, 2014

    कविता को सार्थकता प्रदान करती आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार अलका जी।

basantkumar के द्वारा
February 23, 2014

सुंदर अति सुंदर———-

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 23, 2014

    हृदय से आभार आपका basantkumar ji।

adityaupadhyay के द्वारा
February 23, 2014

भाव-बिभोर पंक्तियाँ हैं , सर ऐसी और अनेक रचनाओं से हमे अवगत करते रहें .. तुम जो छोड़ कर चले गए हो मुझे , कि कम्बख्त अश्क भी पलकों में रह गए हैं मेरे … धन्यवाद सर

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 23, 2014

    आपका हृदय से आभार adityaupadhyay जी।

udayraj के द्वारा
February 22, 2014

आज फिर, यादों में कोई आ गया है। वाह सर जी मजा आ गया । लीजिए अब बसंत आ गया ।

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 22, 2014

    आपकी उत्साहजनक टिप्पणी के लिए बहुत आभारी हुँ उदयराज जी।

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 22, 2014

मस्कुराता फूल फिर कुछ कह गया है, आदरणीय सुरेन्द्र जी अति सुन्दर प्रस्तुति ! सादर !!

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 22, 2014

    कविता को सार्थकता प्रदान करती आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार आचार्य विजय गुंजन जी।

yamunapathak के द्वारा
February 22, 2014

सुरेन्द्र जी ह्रदय स्पर्शी कविता

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 22, 2014

    आपका हृदय से आभार यमुना पाठक जी।

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
February 21, 2014

sundar abhivyakti .badhai

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 22, 2014

    सुन्दर शब्दों में आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद शिखा कौशिक जी।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
February 21, 2014

भावनाओं का अत्यंत सुन्दर चित्रण ,आदरणीय सुरेन्द्र पाल जी ,सादर बधाई .

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 22, 2014

    कविता के विषय में आपकी उत्साहजनक टिप्पणी के लिए बहुत आभारी हुँ निर्मला सिंह जी।

ranjanagupta के द्वारा
February 21, 2014

एक अच्छी भावनात्मक रचना !आदरणीय सत्यशील जी !!बधाई !

deepakbijnory के द्वारा
February 20, 2014

BHAVON से भरी रचना BHAVVIBHOR कर दिया आदरणीय सुरेन्द्र जी

    vaidya surenderpal के द्वारा
    February 22, 2014

    आपका हृदय से आभार दीपक बिजनौरी जी।


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