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रंग बिखराते रहे

Posted On: 13 Mar, 2014 Others,कविता में

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holimadhubani2

रंग बिखराते रहे
——————-
पर्व होली के सुहाने रंग बिखराते रहे।
कल तलक जो दूर थे वो पास भी आते रहे।
——————-
रंग पंखो पर सजाये उड़ रही हैं तितलियां।
रूप मदमाता दिखाकर
खूब भरमाते रहे।
——————-
खो गये सब खूब फाल्गुन की फिजा में देखिये।
मस्त होकर टोलियों में नाचते गाते रहे ।
——————-
चाहतें अब पंख फैलाये उड़ाने भर रही।
जिन्दगी के रंग मुखड़ों पर उतर भाते रहे।
——————-
साथ जुल्फों के उड़ी रंगीन भीगी चुनरिया।
रंग पूरे तन बदन पर खूब बह जाते रहे।
——————-
——————-
-सुरेन्द्रपाल वैद्य।



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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
March 22, 2014

सुरेन्द्र जी तितलियों का प्रसंग बहुत सुन्दर और प्रतीकात्मक बन गया है .पूरी कविता सुन्दर साभार

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 23, 2014

    सुन्दर भावभरी आपकी टिप्पणी के लिए बहुत आभारी हुँ आ.यमुना पाठक जी,

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 23, 2014

    रचना  के लेकर आपकी सार्थक प्रतिक्रिया के लिए बहुत आभाऱी हुं योगी सारस्वत जी।

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 18, 2014

फागुनी फ़िज़ा, होली के इंद्र धनुषी रंग और मन में उठतीं तरंगों का बहुत सजीव चित्रण  करती है आपकी कविता अतिशय सामायिक रचना , , आदरणीय सुरेन्द्र पाल जी ,सादर बधाई .

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 18, 2014

    कविता को सार्थकता प्रदान करती आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए बहुत धन्यवाद निर्मला सिंह जी। होली की हार्दिक शुभ कामनायें।

sanjay kumar garg के द्वारा
March 15, 2014

“पर्व होली के सुहाने रंग बिखराते रहे। कल तलक जो दूर थे वो पास भी आते रहे।” होली मस्ती में डूबी अभिव्यक्ति, आभार आदरणीय सुरेन्द्र जी!

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 18, 2014

    आपका हार्दिक धन्यवाद संजय कुमार गर्ग जी।

nishamittal के द्वारा
March 14, 2014

सुन्दर होली रचना शुभकामनाएं आपको

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 14, 2014

    उत्साहवर्धन करते सुन्दर शब्दों के लिये आपका हार्दिक धन्यवाद निशा मित्तल जी।

deepak pande के द्वारा
March 14, 2014

चाहतें अब पंख फैलाये उड़ाने भर रही। जिन्दगी के रंग मुखड़ों पर उतर भाते रहे। bahut khoobsurat rango me piroya hai kavita holi ke sare rang kavita par najar aa rahe hai holi की बधाई आदरणीय सुरेन्द्र jee

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 14, 2014

    बहुत बहुत आभार आपका दीपक पाण्डे जी, रंगोत्सव की हार्दिक बधाई।

ranjanagupta के द्वारा
March 14, 2014

आदरणीय सुरेन्द्र पाल जी !बहुत प्रवाहमान कविता !सुंदर फागुनी रंगसे सजी !बधाई !!

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 14, 2014

    इस काव्य रचना को सार्थकता प्रदान करती आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत धन्यवाद रंजना गुप्ता जी। होली की हार्दिक शुभ कामनायें।

jlsingh के द्वारा
March 14, 2014

खो गये सब खूब फाल्गुन की फिजा में देखिये। मस्त होकर टोलियों में नाचते गाते रहे । बहुत ही सुन्दर! आदरणीय सुरेन्द्र पल जी!

    vaidya surenderpal के द्वारा
    March 14, 2014

    आपकी उत्साहभरी सुन्दर टिप्पणी के लिए बहुत आभारी हुँ आ. जवाहर जी, होली पर्व की शुभकामनायें।


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