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गौरव गान

Posted On: 15 Aug, 2016 कविता में

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गीतिका
.
अपनी धरती संस्कृति का सम्मान करें हम
सच्चे मन से भारत माँ का ध्यान करें हम
.
मुश्किल से पाई है हमने यह आजादी
ऊँचे स्वर में मिलकर गौरव गान करें हम
.
खूब कमाएं अपना जीवन धन्य बनायें
भूले से भी श्रम का न अपमान करें हम
.
कलकल छलछल बहती नदियों की धारायें
इनको स्वच्छ बनाने का अभियान करें हम
.
सागर जिस भारत माता का वंदन करता
जग में उसकी महिमा का गुणगान करें हम
.
सुरक्षित रखना है गौरवशाली संस्कृति को
इसके जीवन मूल्यों पर अभिमान करें हम
.
**********************
-सुरेन्द्रपाल वैद्य, १५/०८/२०१६
Fantasia Painting(40)



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